पहचान स्पेशल स्कूल में विशेष बच्चों के लिए बुद्धि परीक्षण आयोजित किया गया, जिससे उनके मानसिक स्तर का पता चल सके। इसके बाद, अभिभावकों के लिए एक कैंप आयोजित किया गया, जिसमें मनोवैज्ञानिक शीतल वर्मा ने उन्हें बताया कि कैसे बच्चों की मानसिक उम्र के अनुसार उन्हें सिखाया जा सकता है और नई तकनीकों का उपयोग करके उनका मार्गदर्शन किया जा सकता है। संस्थान द्वारा गतिमान विशेष बच्चों का आईक्यू टेस्ट किया गया था जिसके मुताबिक ही बच्चों के अभिभावकों को ईएस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षित किया गया तकी बच्चों के ऊपर ज्यादा बोज अनजाने में ही ना डाला जाए। इस अवसर पर मनोवैज्ञानिक एवं करियर काउंसिल ने बताया कि इस प्रशिक्षण में अभिभावकों को उनके विशेष बच्चों को किस प्रकार से बहुत अधिक क्षमता के अनुसार ट्रेन किया जा सकता है का प्रशिक्षण प्रशिक्षण दिया गया। पिछले मां किए गए आइक्यू टेस्ट के अनुसार ही बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा जितना उनके बौद्धिक ज्ञान होगा। शीतल वर्मा ने बताया कि बड़े बच्चों का अगर मानसिक विकास छोटे बच्चों की तरह होगा तो उन्हें छोटे बच्चों की तरह ही प्रशिक्षित किया जाएगा। इस अवसर पर पहचान संस्था की निर्देशक चेतन शर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों की बौद्धिक क्षमता के अनुसार प्रशिक्षित करना था। उन्होंने बताया कि इस संस्थान द्वारा बच्चों के ऊपर आइक्यू टेस्ट किया गया तथा उसी हिसाब से उनका प्रोफाइल बनाया गया।