वन वृत्त चंबा और वन मंडल चंबा की विभिन्न नर्सरियों में लंबे समय से दैनिक वेतनभोगी के तौर पर सेवाएं दे रहे श्रमिकों ने नियमितीकरण और लंबित मजदूरी के भुगतान की मांग को लेकर मंगलवार को प्रदर्शन किया। प्रदेश भाजपा कार्यसमिति के सदस्य जय सिंह की अगुवाई में श्रमिकों ने उपायुक्त कार्यालय चंबा के बाहर धरना दिया। इसके बाद सहायक आयुक्त चंबा को ज्ञापन सौंपकर सरकार और वन विभाग के समक्ष अपनी मांगें रखीं। श्रमिकों का कहना है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से वन विभाग की नर्सरियों में दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी उन्हें नियमित नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि नियमितीकरण की मांग उठाने पर कभी अपील बिल तो कभी अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर उन्हें आश्वासन दिया जाता रहा है। मजदूरों विजय कुमार, नरेश कुमार, दलीप कुमार और किशन चंद ने कहा कि वर्ष 2024-25 में व्यवस्था में बदलाव के बाद उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। नर्सरियों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें काम के बदले मजदूरी मिलने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। श्रमिकों के अनुसार नर्सरियों को वर्ष 2024-25 में पर्याप्त बजट नहीं मिला। उनका कहना है कि उपलब्ध करवाई जा रही राशि से एक परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल है। अधिकारियों के समक्ष समस्या रखने पर उन्हें सरकार के पास बजट उपलब्ध नहीं होने की बात बताई जाती है। मजदूरों ने कहा कि मजदूरी समय पर नहीं मिलने से उनके सामने बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती खड़ी हो गई है। लंबे समय से वन विभाग की नर्सरियों में सेवाएं देने के बावजूद नियमितीकरण नहीं होने से भी श्रमिकों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि नर्सरियों में कार्यरत सभी दैनिक वेतनभोगियों की लंबित मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और लंबे समय से सेवाएं दे रहे श्रमिकों की वरिष्ठता सूची तैयार कर नियमों के तहत नियमित किया जाए। श्रमिकों ने बताया कि पिछली बार शिमला में अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने पर वेतन भुगतान के लिए एसओपी तैयार करने का आश्वासन दिया गया था। उनका कहना है कि अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। श्रमिकों ने सरकार से जल्द एसओपी जारी कर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने और नियमितीकरण की मांग का स्थायी समाधान करने की मांग की है।