प्रदेश की सुक्खू सरकार हिमाचल प्रदेश परिवहन सेवानिवृत पेंशनरों के साथ जानबूझकर भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाते हुए घोर अन्याय कर रही है, जबकि प्रदेश के अन्य पेंशनरों को हर महीने की पहली तारीख को पेंशन की अदायगी हो जाती है। इस मामले में व्यवस्था परिवर्तन का राग अलापने वाली प्रदेश सरकार ने किसी नितिगत निर्णय के लिए पेंशनरों की आज तक कोई भी बैठक नहीं बुलाईहै यह बात बिलासपुर में आयोजित पै्रसवार्ता के दौरान प्रदेश संयोजक हिमाचल परिवहन सेवानिवृत्त कर्मचारी परिषद शंकर सिंह ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की आपसी खींचतान और अंदरूनी खुन्नस के कारण सरकार की लाचार दासी बनकर रह गई है,जिसमें वरिष्ठ नागरिक परिवहन पेंशनर इस उम्र ,में बुरी तरह पीसकर घनघोर समस्याओं का सामनाकर रहे हैं। आर्थिक संकट क्या ,परिवहन पेंशनरों और कर्मचारियों के लिए ही है, पांच सलाहकारों के सहारे चलने वाली प्रदेश की सुक्खू सरकार ने इसी महीने पांच उपाध्यक्षों की ,नियुक्ति की है और विपक्ष से मिलकर जिस दरियादिली से विधायकों, मंत्रियों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी की है। सरकार की उस शानो शौकत को देखकर तो यह कतई भी नहीं लगता कि प्रदेश में कोई आर्थिक संकट है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को परिवहन निगम कर्मचारी दिवंगत रसीला राम का पुत्र होने का गौरव प्राप्त है। परिवहन निगम के पेंशनरों और कर्मचारियों को अपने परिवार का सदस्य बताने वाले मुख्यमंत्री सुक्खू को, इतना ध्यान रहे की इतिहास उन्हें राजनेताओं को स्मरण करता है, जो यथास्थिति को ध्वस्त कर लीक से हटकर कुछ क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की हिम्मत और काबिलियत रखते हो। परिवहन पेशनरों के साथ सरकार का यह भेदभाव पूर्ण सौतेला व्यवहार घोर अन्याय और अत्याचार की श्रेणी में आता है। इस मामले में प्रबल संघर्ष का बिगुल बजाने के लिए 31 दिसंबर को पेंशनरों के प्रमुख नेताओं की आवश्यक बैठक सुंदरनगर में बुलाई गई है। इस मौके पर प्रताप ठाकुर, सतीश नड्डा, सुभाष वर्मा, रोशन ठाकुर, कमलदेव सहित अन्य उपस्थित रहे।