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VIDEO : यमुनानगर में कपाल मोचन मेले के दूसरे दिन पहुंचे हजारों श्रद्धालु, पेड़ से सूत बांध मांगी मन्नत, देखें वीडियो

यमुनानगर में अंतराज्यीय कपाल मोचन मेले के दूसरे दिन पंजाब सहित कई प्रदेशों के अलग-अलग जिलों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने यहां स्थित तीनों सरोवर में स्नान व दीपदान किया। साथ ही यहां बने तीर्थ स्थलों के दर्शन किए। मेला क्षेत्र में लगी दुकानों पर जमकर खरीदारी भी की। दर्जनों स्थानों पर लगे भंडारों व लंगर में भोजन व प्रसाद ग्रहण किया। वहीं, तीर्थराज कपालमोचन में लगे कदंब व बेरी के पेड़ों की आस्था की जड़े कई प्रदेशों तक फैली है, क्योंकि मान्यता है कि कार्तिक मास में इन पेड़ों पर सूत बांधने से विवाह व संतान सुख मिलते हैं। यही वजह है कि कपाल मोचन मेले में पंजाब व अन्य प्रदेशों से आने वालेश्रद्धालुओं में कदंब व बेरी के पेड़ पर सूत बांधना नहीं भूलते जबकि, पिछले कई दशक से मेले के दौरान बेरी से बेर तोड़ने के लिए भी होड़ रहने लगी है, इसे भी श्रद्धालु संतान प्राप्ति का प्रसाद बताने लगे हैं। बता दें कि कमाल मोचन के सूरजकुंड सरोवर के एक छोर पर कदंब व दूसरे छोर पर बेरों का पेड़ हैं। इनमें कदंब के पेड़ को महाभारत कालीन बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहीं माता कुंती ने तपस्या की और भगवान सूर्य से कर्ण की प्राप्ति की और तभी से सरोवर का नाम सूरजकुंड है। इसी मान्यता के चलते सरोवर किनारे कदंब के पेड़ पर कार्तिक मास में सूत बांध विवाहिताएं संतान प्राप्ति की मत्रत मांगती हैं। फिर मन्नत पूरी होने पर सूत खोल जाती हैं। इसी तरह अन्य मान्यता अनुसार कदंब के पेड़ पर भगवान श्रीकृष्ण बाल्य काल में लीलाएं करते थे और वे कार्तिक पूर्णिमा के मेले के दौरान पेड़ पर अदृश्य रूप में आकर श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी ही करते करते हैं। इसी मान्यता के चलते अविवाहित युवक-युवतियां मेले के दौरान कदंब के पेड़ पर सूत बांध शीघ्र विवाह की मनोकामना करते हैं। यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा के मेले में सूरजकुंड सरोवर के चारों ओर सूत की 60 से ज्यादा दुकानें लगती हैं। वहीं, मेले में दोनों पेड़ों की परिक्रमा कर सूत बांधने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं होती।

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