मानसून से पहले ही बारिश ने शहर के जल निकासी प्रबंधों का हाल बयां हो गया। शनिवार-रविवार की मध्य रात्रि 118 एमएम बारिश में शहर में सुबह दस बजे तक जलभराव के हालात रहे। प्रोफेसर कॉलोनी, लाजपत नगर, विजय कॉलोनी, टैगोर गार्डन, आजाद नगर, शांति कॉलोनी, शक्ति नगर, जगाधरी में रेलवे रोड जैसे इलाकों में डेढ़-दो फीट तक पानी भरा, जहां बारिश, नाले-नालियों व सीवरेज का पानी घरों में भी घुसा। सुबह नींद खुलते ही लोग घरों से पानी निकालने व आंगन और बाहर जमा कीचड़ साफ करने में लग गए। गलियों सहित हाईवे व अन्य सड़कें भी पानी से लबालब रहे, जिस बीच बंद पड़े वाहनों को लोग धकेलते दिखे। बारिश के साथ चली तेज हवाओं से जगह-जगह बिजली आपूर्ति भी बंद रही, जिससे शहर में रातभर अंधेरा छाया रहा। निगम व पब्लिक हेल्थ के काम पर सवाल शहर में चारों ओर जलभराव और उसके बाद कीचड़ के हालात देख लोगों ने नगर निगम व पब्लिक हेल्थ के काम पर सवाल उठाए। मामले में काफी लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी भड़ास निकाली। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष राहुल भान ने कहा कि माहभर से नगर निगम नाले-नालियाें व पब्लिक हेल्थ सीवरेज सफाई में लगा है। इस काम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, बावजूद इसके शहर में चारों ओर जलभराव हुआ। अभी से यह हाल है तो मानसून में लगातार बारिश से जलभराव के हालात और बिगड़ सकते हैं। विजय कॉलोनी के विकास जैन ने कहा कि उनकी विजय कॉलोनी, लाजपत नगर में हर साल मानसून में तीन फीट तक जलभराव होता है, पर इस बार मानसून से पहले ही बारिश में दो फीट तक जलभराव हुआ। चूंकि नगर निगम नाले-नालियों व पब्लिक हेल्थ सीवरेज सफाई के दावे हैं, पर धरातल पर नाले-नालियां व सीवरेज गंदगी से जाम हैं। इस बारिश से सबक लेकर दोनों विभागों को मानसून से पहले जल निकासी के हालत सुधारने होंगे। पूरे जिले में बरसे मेघा, जगाधरी में ज्यादा रादौर में कम रात 11 बजे से आसमान में बादल छाने लगे। इसके बाद तेज हवाएं चलीं फिर कुछ देर बाद बारिश होने लगी। इस दौरान पूरे जिले में मेघा जमकर बरसे। सबसे ज्यादा जगाधरी में चार घंटे बारिश हुई, जिससे यहां 118 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई। हालांकि बारिश से गर्मी से बेहाल लोगों को राहत महसूस हुई, पर उन्हें गलियों-सड़कों पर जलभराव से आने-जाने में परेशानी हुई। इस दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से भी लोग परेशान हुए। कई जगह घरों व उनके बाहर जलभराव व कीचड़ को लोग सुबह से दोपहर तक साफ करने में लगे रहे। जिले में सबसे कम रादौर में 20 एमएम रिकॉर्ड हुई।