श्रीमद् शंकर स्वामी विश्वदेवानंद तीर्थ धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा निर्जला एकादशी पर्व हर साल की तरह इस साल भी मनाया गया निर्जला एकादशी आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह ब्रत मन और इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना है सबसे बड़ा अभ्यास है इस दिन दान पुण्य का विशेष महत्व जल का कलश मीठा शरबत वस्त्र आम का दान करना चाहिए पांडव भीम को बहुत ज्यादा भूख लगने से बहुत दुखी रहता था दुखी रहने के कारण पांडव भीम ने ऋषि वेदव्यास से अपनी असमर्थता जताई और ज्यादा भूख ना लगे का कारण पूछा वेदव्यास जी ने कहा साल की 24 एकादशी का व्रत का पालन सभी करते हैं परंतु जो व्यक्ति नहीं कर सकता तो ज्येष्ठ मास की शुक्ल एकादशी का पालन करना मृत्यु के बाद विष्णु के धाम बेकुंडा की प्राप्ति होती है पांडव भीम ने निर्जला एकादशी के व्रत का संकल्प कर के पालन किया इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं इस पर पर्व हमें असहाय लोगों की सहायता जरूर करनी चाहिए ताकि इसका फल अधिक मिल सके