विभाजन के दौरान गुलशन डंग के दादा लालचंद डंग का परिवार वर्तमान में पाकिस्तान के सरगोधा से अपना सब कुछ छोड़कर भारत आए थे। भारत में आए तो सबसे पहले पंजाब के लुधियाना में आकर रहे। उसके बाद रोजगार की तलाश में रोहतक के गढ़ी माजरा गांव में आकर रहे। गांव के लोगों ने भी उस समय पूरा सहयोग किया। वहीं गांव में ही ढाबा खोला। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। गुलशन डंग ने बताया कि उनके पिता विभाजन के समय केवल 12 वर्ष की आयु के थे। जब वह विभाजन की बातें बताते थे तो सुनकर ही रूह कांप जाती थी। माता शकुंतला देवी उस समय 2 वर्ष की आयु थी जब वह पाकिस्तान से यहां पर आई। साथ ही बताते है कि उनके दादा लालचंद डंग समेत तीन भाई थे। एक भाई पंजाब के लुधियाना तो एक भाई उत्तर प्रदेश के आगरा में हैं। दोनों ही परिवार आज वहां पर व्यवसाय की बुलंदियों को छू रहे हैं। दादा लालचंद डंग जी व्यवसाय के लिए रोहतक आए और यहां पर ढाबे की शुरूआत करी उसके बाद परिवार ने पीछे मुड़कर नही देखा।