महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल) मान्यता को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर कुलसचिव डॉ. कृष्ण कांत ने स्पष्ट किया है कि नैक मान्यता को लेकर फैली भ्रांतियां बिल्कुल गलत और निराधार है। एमडीयू की नैक ग्रेड थी, नैक ग्रेड है और रहेगी। नैक की नई व्यवस्थाओं के कारण वर्ष 2024 में नैक के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता था जबकि इस दौरान स्वयं नैक ने देश के उच्च शिक्षण संस्थाओं के लिए नई व्यवस्था लागू के तीन माह बाद तक स्वत: नैक की मान्यता रहने के निर्देश दिए थे। एमडीयू के कुलपति कार्यालय में शनिवार को पत्रकारवार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता में कुलसचिव डॉ. केके गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2019 में एमडीयू को नैक से ए प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ था, जिसकी वैधता पांच वर्ष के लिए थी। इस अवधि की समाप्ति से पहले स्वयं नैक ने देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि नैक ने 27 जनवरी 2024 व 5 दिसंबर 2025 की अपनी सार्वजनिक अधिसूचनाओं में स्पष्ट किया है कि वह डॉ. राधाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार बेसिक (बाइनरी) एक्रिडिटेशन और उसके बाद एमबीजीएल (मैच्योरिटी-बेस्ड ग्रेडेड लेवल्स) व्यवस्था की ओर अग्रसर है।