शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर स्वच्छता के नारे तो जोर-शोर से लगाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। लोगों को जागरूक करने के लिए दीवारों पर लिखा गया “साथी रे हाथ से हाथ मिलाना, गली-मोहल्ले में गंदगी न फैलाना” का स्लोगन अब शहर की गंदगी के ढेर के बीच दब गया है। स्लोगन के ठीक नीचे बिखरा कचरा शहर की सफाई व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर पेश कर रहे हैं। दूसरी तरफ से नगर परिषद ने शहर में 200 से अधिक डस्टबिन पार्कों और मुख्य सड़कों पर लगाए हैं। इसका उद्देश्य शहर को साफ-सुथरा बनाना था, लेकिन ज्यादातर डस्टबिन कचरे से लबालब भरे हुए हैं। लोग खाली डस्टबिन के पास नहीं, बल्कि उनके पास ही कचरा फेंक रहे हैं।