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पानीपत में सावन तीज पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, आरती में गूंजे'हर-हर महादेव' के जयकारे

सावन मास के पावन अवसर पर हरियाली तीज और शनिवार के दुर्लभ संयोग पर ऐतिहासिक शहर पानीपत के तमाम शिवालयों और प्रमुख देवालयों में भोर से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देवी मंदिर, सिद्ध पीठ बाबा जोध सचियार मंदिर और श्री राधा कृष्ण मंदिर सहित शहर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और महाआरती का आयोजन किया गया। शहर के प्रसिद्ध श्री राधा कृष्ण मंदिर* में सुबह से ही महिलाओं और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य भगवत शर्मा ने सावन महीने, हरियाली तीज और शनिवार के इस त्रिवेणी योग का धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि यह महासंयोग अत्यंत फलदायी है। आचार्य भगवत शर्मा ने बताया कि हरियाली तीज माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक है। सावन में शनिवार का योग होने से भगवान शिव के साथ-साथ उनके परम शिष्य शनिदेव की भी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस दिन विधि-विधान से किया गया पूजन अखंड सौभाग्य और जीवन में स्थिरता लाता है। दिनभर मंदिरों में भजन-कीर्तन और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण धर्ममय बना रहा। शाम को भव्य आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। पूजा-अर्चना और व्रत के विशेष लाभ: श्री राधा कृष्ण मंदिर दत्ता कॉलोनी के पुजारी आचार्य भगवत शर्मा ने बताया कि अखंड सौभाग्य की प्राप्ति: सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए निर्जला व्रत रखकर माता पार्वती व शिवजी की पूजा की। मनवांछित वर का वरदान: कुंवारी कन्याओं ने मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से बेलपत्र, धतूरा और जल अर्पित किया। शनि कष्टों से राहत: शनिवार के दिन शिवालयों में काले तिल, दूध और जल चढ़ाने से शनि दोष, ढैया और साढेसाती के प्रभाव कम होते हैं।

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