भारतीय सेना की चार- कुमांऊ रेजिमेंट से वर्ष 2009 में सेवानिवृत्त हुए सूबेदार अर्जुन सिंह ने भारतीय सेना की ओर से ऑप्रेशन सिंदूर के तहत की गई एयर स्ट्राइक पर गर्व करते हुए कहा कि सेना का जवाब काबिले तारीफ है। हालांकि यह जवाब बहुत पहले ही दे देना था क्योंकि वर्तमान में भारतीय सेना के पास आधुनिक हथियारों व उपकरणों से लैस है। सेना किसी भी प्रकार के हमले का जवाब देने में सक्षम है। पूरे देश को सेना की इस कार्रवाई पर गर्व हो रहा है। बता दें कि सुबेदार अर्जुन सिंह की दो पीढि़यां देश की रक्षा से जुड़ी रही हैं। इनके पिता वीरचक्र सम्मानित नायक रामकुमार भी 4-कुमाऊं रेजिमेंट की अग्रिम पंक्ति में रहे थे। उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया जिसके चलते भारत सरकार ने 1965 में उन्हें वीर चक्र से नवाजा था। उनका जन्म कनीना में सन 1938 को गुगन सिंह के घर में हुआ था। 1957 को वे सेना में भर्ती होकर देश रक्षा के लिए चले गए थे जिनको प्रशिक्षण के बाद कुमाऊ रेजीमेंट मिली। उन्होंने कहा कि 1965 के युद्ध में उनके पिता ने पाकिस्तान के सैंकड़ों जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। उनके साथी शहीद हो जाने के बाद भी युद्ध के मैदान में डटे रहे तथा आगे बढ़ते रहे। इस युद्ध में शहीद रामकुमार अकेले सैकड़ों पाकिस्तानियों पर भारी पड़े थे। लहुलुहान हालात में भी दुश्मनों को जवाब देते रहे। उनके युद्ध कौशल को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1965 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया।