अब देश भर के प्रमुख व पौराणिक तीर्थों, नदियों, सरोवरों व कूपों के जल का आचमन श्रद्वालु धर्मनगरी में कर सकेंगे। यहीं नहीं यह जल प्रसाद के तौर पर भी मिलने लगेगा। इसके लिए बड़ी पहल गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने की है। गीता मनीषी के प्रयासों से गीता ज्ञान संस्थाम में श्री कृष्ण अमृत कुंड का निर्माण किया गया है। इस कुंड में देश के प्रमुख तीर्थों, प्रमुख नदियों, सरोवरों व कूपों का जल लाकर वेद मंत्र उच्चारण के साथ इस कुंड में समर्पित किया जाएगा। खास तौर से तैयार किए गए कुंड की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाएगा और इस कुंड के जल को संस्थानम में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप भेंट किया जाएगा। कुंड पर किसी भी प्रकार से हाथ धोने से लेकर अन्य प्रयोग के लिए जल लेने की इजाजत नहीं होगी। यहीं नहीं कुंड के इस जल को बारिश, आंधी आदि से भी प्रदूषित होने से बचाया जाएगा। हर तीर्थ पर नहीं पहुंच पाते श्रद्वालु, लेकिन अब जल मिलेगा स्वामी ज्ञानानंद का कहना है कि देश में अनेक पौराणिक तीर्थ, सरोवर, नदियां है लेकिन सभी श्रद्वालु हर तीर्थ पर नहीं जा पाते। फिर भले ही उनकी वहां जाने की इच्छा ही क्यों न हो। ऐसे में अब उन्हें कम से कम इन सभी तीर्थों का जल तो मिल सकेगा। इससे वे आचमन भी कर सकेंगे। यह जल बेहद शुद्ी के साथ प्रयोग किया जा सकेगा। जहां भी जाएं श्रद्वालु, उसी तीर्थ का लेकर लाएं जल उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि जो भी श्रद्धालु तीर्थ यात्रा पर जाए वहां से उस कुंड का जल इस कुंड के लिए लेकर आए। गीता मनीषी ने यह भी जानकारी दी कि गीता ज्ञान संस्थानम परिसर में गुरुकुल और ध्यान साधना केंद्र का शुभारंभ गीता जयंती पर होगा। इस केंद्र में ध्यान साधना की कक्षाएं शुरू की जाएगी