कुरुक्षेत्र: धान की खेती में पानी की खपत कम करने के मॉडल और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को समझने के लिए राजस्थान के अलवर जिले से 32 सदस्यीय किसान दल गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचा। 3 से 7 अगस्त तक चले पांच दिवसीय प्रशिक्षण में कृषि अधिकारियों सहित किसानों ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पक्ष, खेतों में इसके प्रयोग और गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म पर विकसित फसलों व बागवानी का अवलोकन किया। धान की खेती में करीब 50 फीसदी तक पानी बचाने का मॉडल किसानों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। दिल्ली में समाजसेवी सिद्धार्थ गौतम द्वारा संचालित डेवलपमेंट फाउंडेशन के सहयोग से पहुंचे दल में कृषि अधिकारी उम्मेद सिंह व सुभरती सहित 30 किसान शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञ डॉ. हरिओम और डॉ. बलजीत सहारण ने किसानों को केंचुओं की उपयोगिता, ऑर्गेनिक कार्बन, सूक्ष्म जीवों की भूमिका और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने से जुड़े विषयों की जानकारी दी। गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म के भ्रमण के दौरान किसानों ने ड्रैगन फ्रूट, खजूर, अन्ना सेब, केला, ताईवान अमरूद, स्ट्रॉबेरी, आम और लीची सहित विभिन्न फलों की बागवानी देखी। हरी सब्जियों का एटीएम मॉडल भी किसानों के आकर्षण का केंद्र रहा। फार्म पर केंचुए, चिड़िया और गौरैया जैसे मित्रजीवों की मौजूदगी भी किसानों ने देखी।