शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाली जीटी रोड के साथ खुले नाले अब लोगों की जान पर खतरा बनते जा रहा हैं। जीटी रोड के दोनों ओर बने नाले कई जगहों पर 200 से 300 मीटर तक खुले पड़े हैं। उनके ऊपर रखे स्लैब टूट चुके हैं। जबकि हर 50 से 100 मीटर पर नाले के ऊपर रखा स्लैब या तो टूट चुका है या इसे हटा लिया गया है। इन नालों के स्लैब का कंक्रीट घटिया सामग्री का बना हुआ है। इनके सरिए दूर से ही दिखाई देते हैं। इनका मटेरियल लगातार झड़ता जा रहा है। ये हालात शहर के अंदर प्रवेश करने से लेकर शहर के बाहर तक हैं। विशेष तौर पर अनाज मंडी से लेकर नमस्ते चौक तक के हालात बेहद खस्ता हैं। खास बात ये है कि शहर के बीचो बीच गुजरने वाले फ्लाईओवर पर सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत अच्छे स्लोगन तक लिखे हुए हैं लेकिन इनके ठीक नीचे सड़क सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कहीं करीब छह फीट गहरे और चार फीट चौड़े नाले खुले हैं तो कहीं तीन फीट गहरे और दो फीट का नाले पर स्लैब नहीं हैं। ये जीटी रोड के इतने समतल हैं कि रात या बारिश के समय कोई भी वाहन चालक छोटी से गलती में बड़ी दुर्घटना का शिकार हो सकता है और अपनी जान तक गंवा सकता है। दूसरी बड़ी बात ये है कि एनएचएआई के बार बार दावों के बाद भी इनका सुध नहीं ली जा सकी है। पिछले दिनों नगर निगम आयुक्त ने भी एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नालों के स्लैब ढकवाएं। बावजूद आज तक इनकी सुध नहीं ली गई है। यहां तक की नोएडा में एक ऐसे ही हादसे में हुई इंजीनियर की मौत के बाद भी जिम्मेदार जाग नहीं पाए हैं।