संवाद न्यूज, एजेंसी कैथल। कठिन परिस्थितियों में धैर्य, सकारात्मक सोच और नियमित अभ्यास किस तरह जीवन को नई दिशा दे सकते हैं, इसका प्रेरक उदाहरण कैथल के सेक्टर-18 निवासी प्रवीण श्योकंद हैं। वर्ष 2021 में हार्ट अटैक के बाद उन्होंने ऐसी शारीरिक चुनौती का सामना किया, जिसने उनकी बोलने की क्षमता को प्रभावित कर दिया। करीब छह माह तक वह स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाए, लेकिन योग, अनुशासित दिनचर्या और निरंतर प्रयास के बल पर उन्होंने न केवल अपनी आवाज वापस पाई, बल्कि अपने संपूर्ण स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार किया। प्रवीण बताते हैं कि 29 दिसंबर 2021 को उन्हें हार्ट अटैक आया था। उपचार के दौरान उनकी वाणी प्रभावित हो गई और बोलना लगभग बंद हो गया। इस स्थिति ने उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। चिकित्सकीय उपचार के साथ उन्होंने होम्योपैथिक दवाओं का सहारा लिया और योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बना लिया। उन्होंने प्रतिदिन सुबह और शाम एक-एक घंटे योगाभ्यास शुरू किया। कपालभाति और अनुलोम-विलोम को उन्होंने विशेष रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल किया। उनका कहना है कि इन प्राणायामों ने शारीरिक और मानसिक रूप से उन्हें मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योग के साथ उन्होंने रोजाना सुबह और शाम बारहखड़ी का उच्चारण करना भी शुरू किया, ताकि वाणी का अभ्यास लगातार बना रहे। लगातार छह माह तक योग और उच्चारण अभ्यास करने के बाद धीरे-धीरे उनकी आवाज में सुधार आने लगा। समय के साथ बोलने की क्षमता वापस लौट आई और वह सामान्य रूप से संवाद करने लगे। प्रवीण का मानना है कि नियमितता और आत्मविश्वास ने उनके इस सफर को सफल बनाया। वजन भी 100 से घटकर 74 किलोग्राम हुआ प्रवीण के अनुसार योग का लाभ केवल वाणी तक सीमित नहीं रहा। हार्ट अटैक के समय उनका वजन लगभग 100 किलोग्राम था। नियमित योग, संतुलित खानपान और अनुशासित जीवनशैली अपनाने से उनका वजन घटकर 74 किलोग्राम रह गया। इससे उनकी शारीरिक सक्रियता और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि हुई। 200 से अधिक लोगों को कर चुके हैं प्रेरित स्वास्थ्य में आए सकारात्मक बदलाव के बाद प्रवीण अब योग के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य भी कर रहे हैं। वह 200 से अधिक लोगों को योग के लाभों की जानकारी दे चुके हैं और उन्हें नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रभावी स्रोत है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उनकी कहानी योग की परिवर्तनकारी शक्ति का सशक्त संदेश देती है।