कैथल। सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम सिद्ध नहीं हुई है। इस योजना के तहत जिला की करीब 200 से ज़्यादा महिलायें जिले भर में घरों से बाहर निकलकर अपनी किस्मत खुद लिख रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अनाज मंडियों, लघु सचिवालय, शुगर मिल, राजकीय कॉलेज में कैंटीन चला रही हैं। जहाँ मंडियों में किसानों और मजदूरों को मात्र 10 रुपए में भर पेट खाना दिया जा रहा है। इसके अलावा मार्केटिंग बोर्ड भी इन्हें 15 रूपये थाली के हिसाब से मदद कर रहा है। जिला लघु सचिवालय में स्वंय सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं चाय कैंटीन चला रही हैं। ये सभी महिलाएं हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा ट्रेनिंग दिए जाने के बाद से लगातार आगे बढ़ रही हैं। दिहाड़ी-मजदूरी करने वाली ये महिलाएं अब बेहद खुश हैं। लघु सचिवालय में काम करने वाले अधिकारी - कर्मचारी भी अब इनकी चाय के मुरीद हैं। इनकी सेवाओं से अब ग्राहक विशेषकर महिला कर्मचारी भी इनको आगे बढ़ता देख बेहद ख़ुश हैं। यह मिशन महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में एक बड़ा कदम है बल्कि वे इसके तहत घर से बाहर निकलकर अपना व्यवसाय भी चला पा रही हैं तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। इस योजना की विशेष बात यह है कि इस योजना में उन महिलाओं को शामिल किया जा रहा है जिनकी आर्थिक स्थित बहुत ही कमजोर है। योजना के तहत समूह बनाकर ऐसी महिलाओं को बैंक के माध्यम से मामूली ब्याज दर पर बैंक से ऋण उपलब्ध करवा कर उनका व्यवसाय शुरू करवाया जाता है। सरकार की इस योजना से महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी है और वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। नैना निवासी महिला सुमन ने बताया कि जब केंद्र सरकार की ओर से सीआरपी की टीम और हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम उनके गांव पहुंची, तब उन्होंने गांव की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की जानकारी दी। शुरुआत में महिलाएं असमंजस में थीं कि समूह से जुड़ना चाहिए या नहीं। कुछ का मानना था कि इससे कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि नुकसान हो सकता है। जब इस विषय पर परिवार से बात की, तो उनके पति, सास और अन्य परिजनों ने उन्हें समर्थन दिया। परिवार के सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने न केवल खुद बाहर निकलकर काम शुरू किया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया। नैना गांव की ही महिला संतोष ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ही वह स्वावलम्बी व आत्मनिर्भर बन पाई हैं, उन्होंने बताया कि वे पहले एक मज़दूर के तौर पर कार्य करती थी और काफी मेहनत करने के बाद भी परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल होता था। इस योजना से जुड़कर उनके परिवार की आमदनी भी बढ़ी है। स्वंय सहायत समुह के तहत कार्य करने वाली महिला मीना ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं का सामाजिक एवं आर्थिक विकास हो रहा है। उन्होंने बताया कि आजीविका मिशन ने उनकी व उनके परिवार की दशा बदल दी है। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सी महिलाएं घर का काम करने के बाद अपने आपको खाली महसूस करती हैं। लेकिन इस योजना से जुड़कर महिलाएं रोजगार प्राप्त कर सकती हैं।