बाइट : बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरिंदर मेहरा, यशपाल बेरवाल ग्रामीण,सोविन भाटला ग्रामीण -------ग्रामीणों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी संवाद न्यूज एजेंसी हांसी के गांव भाटला में लगातार बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने बिजली विभाग के एक्सईएन कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बिजली कर्मचारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं, जबकि विभाग ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिया है। लेकिन ग्रामीणों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। आपको बता दे कि हांसी के गांव भाटला में लंबे समय से बिजली कटौती की समस्या से परेशान ग्रामीण सोमवार को बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेंद्र नेहरा के कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए गांव की बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग उठाई और 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि कई-कई घंटे तक बिजली गुल रहने से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। 24 घंटे बिजली के लिए मांग की है। सोविन भाटला ने बताया कि तीन दिन पहले भी उन्होंने हांसी-बरवाला रोड जाम कर विरोध जताया था। उस समय एक्सईएन ने मौके पर पहुंचकर जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा बड़ा आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी बिजली विभाग और प्रशासन की होगी। यशपाल बेरवाल ने बताया कि बिजली विभाग के कुछ कर्मचारियों पर ड्यूटी के दौरान नशे में रहने और पुलिस कर्मियों के साथ शराब पीने के गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि इसकी वीडियो भी अधिकारियों को सौंपी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरिंदर मेहरा ने बताया कि ग्रामीणों ने 10 मांगों का ज्ञापन दिया है, जिसमें बिजली लाइनों की मरम्मत, ट्रांसफार्मर बदलने, कर्मचारियों के तबादले और 24 घंटे बिजली आपूर्ति जैसी मांगें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गांव को फिलहाल प्रतिदिन लगभग 16 घंटे बिजली दी जा रही है और तकनीकी कारणों से होने वाली कटौती को जल्द दूर किया जाएगा। कर्मचारियों पर लगे आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ग्रामीण समाधान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन चेतावनी दे चुके हैं कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब देखना होगा कि विभाग कब तक ग्रामीणों की मांगों पर अमल करता है।