टैरिफ बढ़ाने से स्थिति में सुधार नहीं होगा, बल्कि सिस्टम में सुधार करना होगा। चाहे वो ट्रांसमिशन सिस्टम है या चाहे डिस्ट्रीब्यूशन का सिस्टम है। जब तक ये नहीं सधुरेगा, तब तक आप टैरिफ कितना भी बढ़ाते जाए। उसका असर यह होगा कि उद्योग धंधे यहां से पलायन कर जाएंगे, जिससे सरकार को काफी आर्थिक नुकसान होगा। यह कहना था पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत्त सिंह का। वह बुधवार को डीएचबीवीएन की तरफ से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एआरआर याचिका पर आयोजित जनसुनवाई में अपने सुझाव रखने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सरकार की उदय योजना 2015 में हरियाणा में लागू की गई थी और निगमों के 25950 करोड़ रुपये का ऋण अपने जिम्मे लिया। मगर निगम फिर ऋण और घाटे के जाल में फंस चुके हैं। पिछले दिनों केन्द्रीय विद्युत मंत्री ने संसद में बताया कि हरियाणा विद्युत निगमों पर मार्च 2025 तक 20311 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है और निगमों का घाटा बढ़कर 27915 करोड़ रुपये हो गया है। निगमों की स्थिति वापिस चिंताजनक होती जा रही है। निगमों ने 2023-24 में 712.72 करोड़ रुपये और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1605 करोड़ रुपये का लाभ दिखाया है। मगर निगमों ने इस लाभ को 2024-25 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता में जोड़ दिया। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए भी बिजली निगमों ने 4484 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग रखी है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष से दरों के अतिरिक्त सभी उपभोक्ताओं पर अनावश्यक फिक्सड चार्जिज थोंप दिए गए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं पर 50 से 75 रुपये प्रति किलोवाट बिल की दरों में जोड़ दिया है। इसी तरह जहां औधोगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें तो बढ़ाई है लेकिन साथ में फिक्सड चार्ज भी 165 रुपये प्रति किलोवाट की जगह 290 रुपये प्रति किलोवाट कर दिए हैं जबकि दिल्ली और राजस्थान में फिक्सड चार्जिज 125 रुपये और 160 रुपये प्रति किलोवाट है। हरियाणा में उद्योगों का पलायन होना शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि फिक्सड चार्जिज कोई मामूली चार्जिज नहीं है। वर्ष 2025-26 में व आगामी वर्ष 2026-27 में फिक्सड चार्जिज की वसूली लगभग 20000 करोड़ रुपये हो जाएगी जोकि बिजली की दरों से अतिरिक्त होगी।