जिले की महिलाएं लघु उद्यमी बनकर सफलता की ऊंची उड़ान भर रही हैं। गांव खरड़ अलीपुर निवासी मोनिका व सुमन ने घर में चप्पल बनाने की फेक्टरी लगाई है। करीब सालाना पांच लाख का कारोबार कर महिलाओं के लिए आदर्श बनी हुई हैं। गांव की अन्य महिलाएं भी उनके लघु उद्योग से जुड़ रही हैं। जिससे उनकी आजीविका चलाने के साथ ही समाज में एक पहचान व सम्मान मिल सके। जिले के गांव खरड़ अलीपुर निवासी मोनिका ने बताया कि वह गरीब परिवार से हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए हमेशा से ही सोचती थी। पारिवारिक कारणों के चलते ही 10वीं कक्षा पास कर पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद शादी हो गई तो अपने ससुराल आकर चूल्हा चौका की बजाए सरकार से मिलने वाली सुविधाओं से अपना कारोबार करने की ठानी। अपनी जेब से ही 20 हजार रुपये लगा कर चप्पल बनाने के लिए काम शुरू किया। दिल्ली से एक छोटी मशीन व कच्चा सामान खरीद कर लाईं। साथ में ही अपनी सहेली सुमन को भी जोड़ लिया। घर पर ही चप्पल बनाने का छोटा लघु उद्योग लिया। हरियाणा ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन की मदद से यह उद्योग शुरु किया तो काफी लोगों ने हौसला दिया। मोनिका ने बताया कि प्रति चप्पल जोड़ी 50 रुपये, 100 रुपये से लेकर 150 रुपये तक कीमत रखी हैं। दोनों मिलकर सालाना करीब पांच लाख रुपये का कारोबार कर रही हैं। उनके समूह की दस महिलाएं सदस्य भी उनके साथ जुड़कर चप्पल सप्लाई करने व सेल्समैनी के काम कर रही हैं। मोनिका ने बताया कि अब वह बड़ी मशीनों से चप्पलों की कटाई खुद करती हैं। दिल्ली से माल लाना पहले मुश्किल लगता था लेकिन अब कोई परेशानी नहीं। पहले एक मशीन थी। जिन्हें बढ़ाकर तीन कर दिया है।