जिले के गांव खारा खेड़ी, चिंदड़ और कुम्हारिया में मानसून की पहली ही बारिश से जलभराव की समस्या बनी हुई है। इससे ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। एक माह बीतने के बावजूद गलियों में दो-दो फीट तक पानी जमा है। इसके चलते ढाणियों के लोग अपने घर को छोड़कर दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं। गेहूं की बिजाई शुरू होने में महज एक माह का समय बचा है जबकि जमीन के हालात देखकर इस बार गेहूं की बिजाई होना नामुमकिन ही नजर आ रहा है। बारिश से जिले के करीब 240 गांवों में जलभराव की समस्या बनी थी। लेकिन अब इनमें अधिकतर गांवों की आबादी से पानी निकलने के बाद लोगों को राहत मिल चुकी है। लेकिन गांव खारा खेड़ी, सालमखेड़ा, धारणियां, धांगड़, चिंदड़, बड़ोपल और कुम्हारिया में पिछले एक माह से लोग जल निकासी का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि सिंचाई विभाग की ओर से जल निकासी का काम जारी है। ग्रामीणों की ओर से भी पानी निकालने में विभाग की मदद की जा रही है। जल निकासी में 15 दिन का समय और लगने की आशंका सिंचाई विभाग ने गांवों से पानी निकालने के लिए पाइपलाइन बिछाकर जल निकासी कार्य शुरू कर दिया है। इससे यह पानी गांव से गुजर रहीं नहरों में डाला जा रहा है। गांव कुम्हारिया के ग्रामीणों के अनुसार चार से पांच फीट तक पानी जमा था, जो कि अब कुछ कम होने के बावजूद भी दो से तीन फीट तक जमा है। ऐसे में जलभराव की समस्या से पूरी तरह निजात पाने में अभी और करीब 15 दिनों का समय लग सकता है।