हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पुलिस हिरासत में मौत व अत्याचार मामलों में मुआवजा के लिए न्यायिक हिरासत जैसी नीति बनाने की बात कही है। आयोग ने राज्य सरकार से नीति पर ताजा अपडेट मांगा है। आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने इंस्पेक्टर जगदीश चंदर पर लगाए गए दंड की पुनः समीक्षा के निर्देश दिए हैं। भाटिया ने कहा कि हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन रोकने के लिए संस्थागत सुधार जरूरी है। रिपोर्ट में गृह विभाग ने बताया कि मुआवजा नीति का ड्राफ्ट तैयार है। हरियाणा पहले ही जेल में मौत के मामलों में मुआवजा नीति लागू कर चुका है। न्यायिक हिरासत में अप्राकृतिक मौत पर 7.5 लाख तक मुआवजे का प्रावधान है। आयोग ने कहा कि पुलिस हिरासत मामलों के लिए भी व्यापक नीति बने।