हरियाणा के बहुचर्चित श्रम विभाग के 1500 करोड़ रुपये के वर्क स्लिप घोटाले की जांच में बड़ा राजफाश हुआ है। जांच में पहले स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में मजदूरों के पंजीकरण में बड़े स्तर पर गलती की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक जांच में पाया गया कि मजदूर काम करने के बाद उसका पंजीकरण करवाने के लिए सीएससी सेंटर गए। वहां एक-एक पते पर मजदूरों के नाम, मोबाइल नंबर व ज्यादातर काम को कंप्यूटर में कट-कॉपी-पेस्ट करके चढ़ा दिया गया। सिर्फ मजदूर का मोबाइल नंबर ठीक डालने पर वन टाइम पासवर्ड मिलता गया जिससे उनकी वर्क स्लिप जारी होती गई। उसके बाद वर्क स्लिप को सत्यापित करने वाले अधिकारियों की तरफ से गड़बड़ किए जाने की बात सामने आई है। मजदूरों के पंजीकरण और उनकी तय फीस जमा होने के कारण संबंधित अधिकारियों ने वर्क स्लिप की जांच किए बगैर ही धड़ाधड़ उनको अप्रूव भी कर दिया। इस अप्रूवल के बाद लाभ राशि सीधा डायरेक्टर बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए उनके खाते में पहुंचती गई। अब जांच में अधिकांश मजदूर ठीक मिले हैं लेकिन उनके पंजीकृत पते फर्जी निकले। 22 जिलों में चार माह तक जांच पूरी होने के बाद श्रम विभाग के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करने में लगे हैं।