एतिहासिक, धार्मिक और सामरिक दृष्टि से महत्व रखने वाली बाबा मुंगीपा पहाड़ी तोशाम में एक समय दिन रात खनन कार्य की गूंज रहती थी। पहाड़ी से निकले पत्थर की गुणवत्ता ऐसी होती थी कि दूर-दराज की सड़कें ही नहीं बल्कि हिसार, सिरसा, भटिंडा की हवाई पट्टियों में भी इसका इस्तेमाल होता था। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग द्वारा टिन धातु की खोज के लिए सर्वे का कार्य आरंभ होने के कारण 1979 में खनन कार्य बंद कर दिया गया। सर्वे का कार्य बंद होने के कुछ सालों बाद पहाड़ को अरावली पर्वत श्रृंखला में घोषित कर दिया गया। तोशाम की बाबा मुंगीपा पहाड़ी वर्तमान में अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। 44.8 हेक्टेयर में फैली पहाड़ी के काफी हिस्से में पौधरोपण किया गया है। सन 2000 के बाद ही यह पहाड़ी अरावली क्षेत्र में शामिल की गई है। इससे पहले 1955 में पहाड़ी में खनन कार्य शुरू किया गया था। उस समय पांच हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ था। ब्लास्टिंग से लेकर पत्थर तोड़ने, लोडिंग-अनलोडिंग आदि सभी प्रकार का खनन कार्य मैन्युअल हुआ करता था। दो सौ से ढाई सौ गाड़ियां प्रतिदिन पत्थर से लोड होकर पहाड़ी से निकलती थी। चौ. बंसीलाल जब प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तब शुरूआती दिनों में इलाके में जितनी सड़कें बनी उनमें तोशाम के पत्थर का इस्तेमाल किया जाता था। यहां का पत्थर राजस्थान के गंगानगर से लेकर पंजाब तक जाता था।