प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 में अंग्रेजों को मौत के घाट उतारकर देश को स्वतंत्र कराने के लिए संघर्ष करने वाले शहीद सरदार अली खान को आज भी गोरखपुरवासी नमन करते हैं। शहर की कोतवाली स्थित थाने के सामने उनका मजार आज भी स्थापित है। इतिहासकारों के अनुसार सरदार अली खान 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले महान सेनानी थे। 1858 में अंग्रेजों ने उन्हें कोतवाली के सामने फांसी दे दी थी। फांसी के बाद से ही यहीं उनका मजार स्थापित है, जो 1857 की क्रांति की गवाही देता है।