मिसाइलमैन ए पी जे अब्दुल कलाम की रॉकेट टेक्नॉलॉजी को पीछे छोड़ स्वदेशी तकनीक से देश में ही क्रायोजेनिक इंजन बना डालने वाले को क्या ईनाम मिलना चाहिए? आप कहेंगे कि पद्मश्री, पद्मविभूषण या फिर और भी कोई बड़ा पुरस्कार। लेकिन, इस साइंटिस्ट को अपने ही देश में मिला देशद्रोही का तमगा, बेइज्जती और पुलिस हवालात। चौंक गए न, जी हां, इसरो के साइंटिस्ट रहे नंबी नारायणन की कहानी है ही ऐसी। अब उन पर एक बायोपिक बनने जा रही है। फिल्म तो जब आएगी, जब आएगी, अभी आप देखिए अमर उजाला टीवी पर इस फिल्म से पहले इस साइंटिस्ट की ये सनसनीखेज कहानी।