राजधानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन साल 2002 की मतदाता सूची अब हजारों लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। दिल्ली के कई इलाकों में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो उस समय 18 साल की आयु पूरी कर चुके थे, लेकिन पढ़ाई, नौकरी, जानकारी के अभाव या दूसरे कारणों से मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा सके। अब सत्यापन के दौरान ऐसे लोगों को पुराने रिकॉर्ड के अभाव में परेशानी उठानी पड़ रही है।