भोले की भक्ति ही है कि पैरों में छाले होने के बाद भी अपनी कांवड़ यात्रा पूरी करने की जिद लिए कांवड़िए लगातार आगे बढ़ रहे हैं। शिविरों में रुकते हैं तो दर्द का एहसास होता है। पैर के तलवे में मेंहदी और नील लगाकर छालों की जलन को कम करते हैं और फिर निकल पड़ते हैं अपने मंजिल की ओर। वीडियो दिलशाद गार्डन से कश्मीरी गेट के बीच स्थित शिविरों की है।