दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए स्वत: संज्ञान लेते हुए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने फैसले में कहा कि दिल्ली में घरेलू सीवेज और औद्योगिक कचरे का मिश्रण हो रहा है। ज्यादातर इंडस्ट्रीज बिना ट्रीटमेंट के कचरा नालों में डाल रही हैं, और ट्रीटेड पानी अनट्रीटेड कचरे के साथ मिलकर यमुना में बह रहा है। इससे ट्रीटमेंट का पूरा उद्देश्य बेकार हो जाता है। अदालत ने दिल्ली सरकार की 29 अगस्त 2025 की एक्शन टेकन रिपोर्ट को रिपोर्टों से विपरीत बताते हुए कहा कि बिना ब्लेम गेम के तीन मुख्य पहलुओं पर व्यापक कदम उठाने की जरूरत है