जहां एक ओर देश की सरकारें ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने के लिए तालाबों और झीलों को बचाने का अभियान चला रही हैं। वहीं दूसरी ओर एक समय पूर्वी दिल्ली की पहचान रही त्रिलोकपुरी स्थित संजय झील आज अपनी सबसे बुरी हालत में पहुंच चुकी है। कभी जहां पानी की लहरों पर नावें चलती थीं, प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट गूंजती थी और सुबह-शाम सैकड़ों लोग सैर के लिए पहुंचते थे, वहीं अब वहां सूखी जमीन, गाद, बदबू और वीरानी पसरी हुई है। 17 हेक्टेयर में फैली यह झील धीरे-धीरे बंजर मैदान में बदलती जा रही है।