बच्चों को अपराध, साइबर ठगी और शोषण से सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने स्कूलों से लेकर स्लम तक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। मध्य और उत्तरी जिला पुलिस की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में बच्चों को साइबर सुरक्षा, कानूनी अधिकार, आत्मरक्षा और आपात स्थिति में मदद लेने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है। मध्य जिला पुलिस ने पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर के देखरेख में स्टूडेंट सेफ्टी एंड लीगल अवेयरनेस आउटरीच प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत पुलिस अधिकारी विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर छात्रों को साइबर अपराधों से बचाव, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में जागरूक कर रहे हैं। छात्रों को पुलिस इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन 1930 की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें ओटीपी, पासवर्ड, पता और लाइव लोकेशन जैसी निजी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई। इसके साथ ही उन्हें साइबर बुलिंग, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन ठगी की शिकायत तुरंत पुलिस या अभिभावकों को देने के लिए कहा गया है। कार्यक्रम में बच्चों को गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा, जीरो एफआईआर, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और साइबर अपराधों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आत्मरक्षा के आसान तरीके अपनाने और किसी भी आपात स्थिति में बिना झिझक पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया। उधर, उत्तरी जिला पुलिस ने चाइल्ड सेफ्टी अवेयरनेस मंथ के तहत तीस हजारी स्थित सलाम बालक ट्रस्ट चाइल्ड केयर सेंटर में बाल कल्याण एवं विकास कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने बताया कि उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर एक से 30 जुलाई तक चल रहे अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 7 से 17 वर्ष आयु वर्ग के करीब 110 बच्चों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉक्टर रश्मि सिंह, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त निहारिका भट्ट, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त दो राम दुलेश मीणा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। एनजीओ अनमोल सहारा, महिला थाना और कम्युनिटी पुलिसिंग सेल की टीम ने बच्चों को चाइल्ड सेफ्टी, साइबर सुरक्षा, गुड टच-बैड टच, पॉक्सो एक्ट, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, इमरजेंसी नंबर 112, नशा मुक्ति, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, कानूनी साक्षरता और करियर मार्गदर्शन की जानकारी दी।