डाढ़ा गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मंगलवार को बिजली आपूर्ति बाधित होने से स्वास्थ्य सेवाएं तरह चरमरा गईं। अस्पताल कर्मियों को मोबाइल फोन की रोशनी में मरीजों को इंजेक्शन लगाने पड़े। भीषण गर्मी और उमस के बीच मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली नहीं होने से अस्पताल की अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक मशीनें बंद रहीं। जिसके चलते आंख, दांत और फिजियोथेरेपी विभाग में इलाज प्रभावित रहा। सीएचसी में मंगलवार दोपहर करीब दो बजे से बिजली आपूर्ति ठप हो गई हैं। बुधवार को भी बिजली बहाल नहीं होने से अस्पताल प्रशासन के सामने संकट की स्थिति बन गई। अस्पताल में आने वाले मरीजों को न केवल गर्मी झेलनी पड़ी, बल्कि जरूरी जांच और उपचार भी नहीं मिल सका। सीएचसी में सबसे अधिक असर दांत, आंख और फिजियोथेरेपी विभाग पर पड़ा। इन विभागों में उपयोग होने वाली मशीनें बिजली पर निर्भर हैं। बिजली कटौती के कारण करीब 60 से 70 मरीजों को बुधवार को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा। अस्पताल प्रशासन ने इन मरीजों को अगली तारीख देकर दोबारा आने के लिए कहा। कुछ मरीज पेड़ों की छांव में बैठकर बिजली आने का इंतजार करते रहे, जबकि कई लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर चले गए। वहीं, बिजली कटौती की कारण परिसर में लगे वाटर कूलर भी बंद पड़े हुए हैं। सीएचसी में रैबीज, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लगाए जाने वाले करीब तीन हजार टीके स्टोर किए गए हैं। इन टीकों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार निर्धारित तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से कोल्ड चेन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय रहते बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो बड़ी संख्या में टीके खराब हो सकते हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बीते डेढ़ महीने में यह तीसरी बार है जब सीएचसी की बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित हुई है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। जबकि अस्पताल में अधिक समय तक बिजली आपूर्ति नहीं होने से बैकअप व्यवस्था भी चरमरा गई हैं। बिजली आपूर्ति को दुरुस्त करने के लिए डीएम कार्यालय व एनपीसीएल में शिकायत की गई हैं। एनपीसीएल की ओर से बिजली सप्लाई को दुरुस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मरीजों के लिए पानी की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, ओपीडी में मरीजों की अधिक भीड़ न हो इसके लिए तीन चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज किया गया। डॉ. नारायण किशोर, चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी, डाढ़ा