ग्रेनो प्राधिकरण की ओर से डाढ़ा गांव को भले ही दो दशक पहले आदर्श गांव घोषित कर दिया गया हो, लेकिन यहां के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्राधिकरण ने भूमि-अधिग्रहण तो कर लिया, लेकिन आज तक चार प्रतिशत प्लाट का वादा नहीं पूरा किया है। अब अधिकारियों की ओर से सिर्फ तारीख पर तारीख ही मिलती है। लोगों का आरोप है कि प्रदर्शन करने से लेकर कोर्ट तक के चक्कर लगाकर थक गए हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। ग्रेटर नोएडा के डाढ़ा गांव में सोमवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में ग्रामीणों ने समस्याएं बताईं। लोगों का आरोप है कि गांव में करीब एक दशक पहले पानी सप्लाई और सीवर की लाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज सप्लाई लाइन से एक बूंद पानी नहीं आया है। गांव के लोग बोरवेल के पानी के सहारे रहते हैं। साथ ही सीवर की लाइन भी आज तक चालू नहीं हो पाई हैंं। कई बार प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत भी की गई। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। जिस कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि गांव की कुछ ही गलियों में जब कभी सफाई कर्मी झाड़ू लगा कर चले जाते हैं। बाकी में ऐसे ही गंदगी फैली रहती है। जिस कारण गांव में विभिन्न तरह की बीमारियां फैलती रहती हैं। साथ ही नालियों का पानी सड़कों पर बहा करता है। जिससे लोगों का निकलना मजबूरी होता है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बने शमशान घाट की व्यवस्था वो खुद कर रहे हैं। यहां पर बैठने से लेकर पानी और छाया तक की सारी व्यवस्था की है। प्राधिकरण की ओर से तो सिर्फ खानापूर्ति कर दी गई थी। वहीं, बारात घर की भी स्थित बदहाल हो चुकी है। टेंट लगाकर लोग सामूहिक या शादी विवाह कार्यक्रम करते हैं। गांव में लगे बिजली के पोलों पर लगी स्ट्रीट लाइटें शोपीस बनी हुई हैं। जिस कारण शाम ढलते ही गांव में अंधेरा छा जाता है। लोगों को कहना है कि अगर उन्हें शाम के समय कहीं बाहर जाना होता है तो मोबाइल फोन के फ्लैश लाइट का प्रयोग करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है गांव के मुख्य मार्ग से लेकर गलियों तक की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। जिस कारण आवागमन करने में दिक्कतें होती हैं। जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के समय में गलियों में जलभराव हो जाता है। इसके अलावा नालियों का भी पानी सड़कों पर भर जाता है। जिस कारण कई बार दो पहिया वाहन सवार सड़क हादसे का शिकार हो जाते हैं। अधिकारियों से शिकायत किए जाने पर सिर्फ आश्वासन मिलता है। कभी समस्या का समाधान होता ही नहीं है। गांव में खेल का मैदान नहीं होने के कारण बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार अधिकारियों से मांग की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गांव के लोगों का कहना है कि खेल का मैदान नहीं होने के कारण बच्चों को खेलने के लिए गांव के बाहर जाना पड़ता है।