20 से 30 साल के युवा सबसे अधिक हाइपरटेंशन से पीड़ित हो रहे हैं। पहले यह समस्या 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में भी इसके मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। प्रतिदिन ओपीडी में 20 से 25 फीसदी मामले हाइपरटेंशन के देखने को आ रहे हैं। वहीं, युवा मरीजों में 15-20 प्रतिशत युवाओं को हाइपरटेंशन की समस्या देखने में आ रही है। हाइपरटेंशन की समस्या उन युवाओं में ज्यादा देखने को मिलती है जो मोटापे की समस्या से ग्रस्त होते हैं, जिनका खान-पान ठीक नहीं है, जो बॉडी बिल्डिंग के नाम पर बहुत ज्यादा प्रोटीन लेते हैं। यह बातें फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के डायरेक्टर इंटर्नल मेडिसिन डॉ. दिनेश कुमार ने विश्व हाइपरटेंशन दिवस की पूर्व संध्या पर बताईं। उन्होंने बताया कि फास्ट फूड कल्चर, असंतुलित खान-पान, अत्यधिक तनाव, नशे की आदत, कम नींद, बढ़ता मोटापा, यह सभी कारक हाइपरटेंशन की संभावना को बढ़ाते हैं। यदि हम अपनी दिनचर्या और आदतों में सुधार करें, तो इस स्थिति से बचाव संभव है। भारत में लगभग हर पांचवां व्यक्ति ब्लडप्रेशर से परेशान है।