नोएडा। सेक्टर-62 स्थित योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (YSS) का आश्रम शनिवार की शाम उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा जब हजारों लोगों ने भक्ति, कीर्तन और ध्यान के माध्यम से एक अद्भुत आंतरिक शांति का अनुभव किया। यह अवसर केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक स्मृति का पुनर्जीवन था, जो परमहंस योगानन्द जी द्वारा 1926 में न्यूयॉर्क के कार्नेगी हॉल में दिए गए भक्ति-कीर्तन के शताब्दी वर्ष को समर्पित था। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी स्मरणानन्द जी और स्वामी अद्यानन्द जी के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुआ। स्वामी स्मरणानन्द जी ने कहा कि आत्म-शक्ति से परिपूर्ण संगीत ही सार्वभौमिक भाषा है, जो सीधे हृदय को परमात्मा से जोड़ता है। उन्होंने बताया कि भक्तिमय कीर्तन केवल संगीत नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो मन को एकाग्र कर भीतर की चेतना को जाग्रत करती है। दूसरी ओर अमर उजाला से बात करते हुए स्वामी आलोकानंद जी ने बताया कि लोगों के जीवन में आध्यात्म की कितनी जरूरत है।