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ग्रेटर नोएडा: दहेज, नशा और बेरोजगारी पर होगा मंथन, चित्रकूट में जुटेंगे देशभर के गुर्जर बुद्धिजीवी

बदलते सामाजिक परिवेश में गुर्जर समाज अपनी चुनौतियों और भविष्य की दिशा तय करने के लिए आत्ममंथन की राह पर निकल पड़ा है। दहेज प्रथा, नशे की बढ़ती लत, मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों से लेकर शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी जैसे अहम मुद्दों पर मंथन के लिए 26 से 28 जून तक चित्रकूट में तीन दिवसीय गुर्जर चिंतन शिविर आयोजित किया जाएगा। गुर्जर बौद्धिक संघ के राष्ट्रीय संयोजक जय कुमार गुर्जर ने बताया कि शिविर का उद्देश्य केवल समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी आवाज सुनना और समाधान की ठोस रणनीति तैयार करना है। शिविर में सामाजिक सरोकारों के तहत दहेज प्रथा के कारण बेटियों पर बढ़ रहे अत्याचार, नशे की प्रवृत्ति और मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण पर विशेष चर्चा होगी। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाई छोड़ने वाले युवाओं की संख्या, उच्च शिक्षा में कम भागीदारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उपाय तलाशे जाएंगे। आर्थिक मोर्चे पर कृषि और पशुपालन पर बढ़ती निर्भरता, घटती भूमि और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों पर विचार होगा। इस पर विचार करके नई रास्ते तलाशे जाएंगे। जिससे युवाओं को उस ओर बढ़ाया जा सके। राजनीतिक स्तर पर पंचायत से संसद तक समाज की भागीदारी और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की समीक्षा भी की जाएगी। इस क्षेत्र में समाज की भागीदारी को बढ़ाने को लेकर विचार विमर्स किया जाएगा। समाज का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके। जय कुमार गुर्जर ने बताया कि शिविर में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से 300 से अधिक बुद्धिजीवी भाग लेंगे। स्वतंत्रता के 77 वर्षों में समाज ने क्या पाया और क्या खोया, इसका भी व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा। समाज ने जो खोया है उसको फिर से हासिल करने के लिए विचार किया जाएगा। शिविर के दौरान देशभर में जिला स्तरीय समितियों के गठन और समाज के वैचारिक नेतृत्व को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है। आयोजन को सफल बनाने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो के जरिए अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने की अपील की जा रही है। जिससे समाज के लोगों के बहुमूल्य विचारों को सुनकर उन पर काम किया जा सके। चित्रकूट में होने वाला यह चिंतन शिविर केवल एक बैठक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और भविष्य की नई दिशा तय करने का मंच बनने जा रहा है। शिविर को लेकर गौतमबुद्धनगर समेत आसपास के जिलों के लोगों में काफी रूझान है। अभी से लोग तैयारियों में जुटे है। प्रमुख लोगों से कार्यक्रम की जानकारी देकर उनके विचार लिए जा रहे है।

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