कंधे पर कांवड़... पैरों में छाले... चेहरे पर थकान और होंठों पर सिर्फ एक नाम—'हर-हर महादेव'। सावन में दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से गुजरता कांवड़ियों का यह कारवां सिर्फ धार्मिक यात्रा की तस्वीर नहीं दिखाता, बल्कि आस्था, अनुशासन और संकल्प की ऐसी कहानी भी कहता है, जिसमें उम्र की कोई सीमा नहीं है। इन्हीं में 60 वर्षीय राधा शर्मा हैं। वह इस बार अपनी 21वीं कांवड़ यात्रा पर हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकली राधा बदरपुर बॉर्डर स्थित भट्ट कैंप शिव मंदिर में जल अर्पित करेंगी। करीब 12 दिन की इस यात्रा में वह लगातार पैदल आगे बढ़ रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके कदम नहीं रुके हैं। उनके लिए कांवड़ सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही आस्था और संकल्प का हिस्सा है।