ग्रेटर नोएडा में घड़ी की सुई पर शाम छह बजते ही सायरन की आवाज के साथ ही भगदड़ मच गई। बंकर में छुपे लोग अपनी जान को बचाने के लिए भागने लगे। कोई बेहोश हो चुका था तो कोई घायल होकर चीख-पुकार कर रहा था। लोगों की चीख-पुकार सुनकर तुरंत राहतकर्मी बचाव कार्य के लिए जुट गए। हर कोई लोगों को बाहर निकालकर उन्हें स्ट्रेचर पर लादकर प्राथमिक सहायता देने में लग गया। यह दृश्य कोई सत्य घटना का नहीं था बल्कि शारदा विश्वविद्यालय में प्रशासन की ओर से मार्कड्रील के आयोजन में हो रहा था। विश्वविद्यालय में लगी आग को बुझाने के लिए पहुंची फायर की गाड़ी में फायर एक्सटिंग्विशर ने धोखा दे दिया। कर्मी की ओर से आग वाले स्थान पर पहुंचकर आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर निकाला गया, लेकिन वह चला ही नहीं। दूसरे कर्मी के फायर एक्सटिंग्विशर ने किसी तरह आग पर काबू पाया।