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20 वर्ष बाद भी नहीं हुआ घोड़ी बछेड़ा गांव का विकास, मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे लोग

ग्रेटर नोेएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव निवासी जमीन अधिग्रहण के 20 वर्ष बाद भी मुलभूत सुविधाओं को तरस रहे है। गांव में न पार्क की व्यवस्था है। न खेल मैदान और पुस्तकालय बने हुए है। साथ ही गांव में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। सीवरों के मैनहोल टूटे हुए है। पेयजल की व्यवस्था नहीं है। निवासी समरसेबल पर निर्भर है। गांव में निकली 11 हजार लाइन के खंभे जर्जर हो चुके है। जिससे यहां के लोगों को किसी अनहोनी का डर सता रहा है। शिकायत पर प्राधिकरण व एनपीसीएल के अधिकारी तक नहीं आते है। निवासियों ने ये समस्याएं सोमवार को आयोजित अमर उजाला ग्रामीण संवाद कार्यक्रम में बताईं। उन्होंने बताया कि 20 वर्ष पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने गांव की जमीन का अधिग्रहण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया था। लेकिन निवासियों को प्राधिकरण की ओर से कोई भी मुलभूत सुविधा का लाभ नहीं मिला है। गांव में मरीजों के लिए अस्पताल तक की सुविधा नहीं है। पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। बारिश में रास्तों में जलभराव हो जाता है। जबकि यहां के तालाबों का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ है। स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई है। गांव में 12 से 13 घंटे ही बिजली की आपूर्ति मिल रही है। जबकि बिल शहर के रेट के अनुसार भेजा रहा है। ऐसे में भीषण गर्मी में लोगों को बुरा हाल है। वहीं, गांव के युवाओं को प्राधिकरण की ओर से रोजगार तक नहीं मिला है।

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