गुरुग्राम में सस्पेंशन व अन्य तकनीकी खामियों के कारण रोजाना 8 से 10 गुरुगमन सिटी बसें बीच रास्ते में खराब हो रही हैं। इससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर-10 स्थित गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) के डिपो में रोजाना बसों को ठीक करके रूटाें पर भेजा जाता है। लेकिन तकनीकी खामियों या गर्मी में ओवरहीट होने से बसें बीच रास्ते खराब होना यात्रियों के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। बस खराब होने के बाद ऑटो लेकर गंतव्य तक पहुंचने पर यात्रियों को दोगुना किराया देना पड़ता है। जीएमसीबीएल की ओर से वर्ष 2018 से गुरुग्राम में लाे फ्लाेर सिटी बसें चलाई जा रही हैं, जोकि वर्तमान में काफी जर्जर व पुरानी हालत में हैं। ऐसे में अब इन बसों में मेंटेनेंस की ज्यादा जरूरत है। गुरुगमन सिटी बसों के खराब होने की मुख्य वजह इनके सभी पार्ट्स नहीं मिलना है। गुरुग्राम में करीब 23 रूटों पर 155 सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। जीएमसीबीएल के अधिकारियों के अनुसार करीब 8 साल पुरानी सिटी बसों का माॅडल कंपनी ने बनाना बंद कर दिया है। ऐसे में इन बसों के मुख्य स्पेयर पार्ट्स समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। तकनीकी खामियां, बढ़ता मेंटेनेंस खर्च और स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण बसों के सुचारू संचालन में बाधा आ रही है। इसके अलावा शहर की कई सड़कों में गड्ढों के कारण लो-फ्लोर सिटी बसों के सस्पेंशन व इंजनों को नुकसान होता है। सस्पेंशन व इंजनों में नुकसान पहुंचाने पर रोजाना एक या दो बस को क्रेन से टो करके डिपो की वर्कशॉप तक ले जाना पड़ता है। गर्मियों में तापमान 40 से 45 डिग्री पार होने के कारण सिटी बसों के इंजन जल्दी गर्म होकर बीच सफर में दम तोड़ देते हैं। सेक्टर-10 स्थित जीएमसीबीएल बस डिपो के वर्कशॉप हेड ताहिर सिंह का कहना है कि सिटी बसों का मेंटेनेंस व सर्विस बराबर की जा रही है। चलते-चलते जो बसें खराब होती हैं, उन्हें तुरंत ठीक करने के लिए टीम भेजी जाती है।