कोरबा में शारदीय नवरात्रि के आज 10 वें दिन अश्विन शुक्ल नवमी को कोरबा की जीवन रेखा पवित्र हसदेव नदी की गोद में जवारा कलशों का विसर्जन करने के साथ ही जगत कल्याणी माँ सर्वमंगला देवी मंदिर में शारदीय नवरात्रि आध्यात्मिक जागृति के साथ सम्पन्न हो गई। कल अष्टमी को ज्योति कलशों का हवन-पूजन के साथ शारदीय नवरात्रि को विराम दिया गया था। राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने अपनी माँ एवं धर्मपत्नी के साथ कलश को सिर पर रखकर विसर्जित करने वाली नारी शक्ति की पूजा अर्चना करने के बाद हसदेव घाट की ओर ससम्मान रवाना किया। पाण्डेय परिवार ने बैगाओं को शांत कराया। जवारा कलशों को चुनरी द्वार से हसदेव नदी तक रवाना किया गया। रक्षक दल के रूप में हनुमान एवं उनकी वानर सेना आगे-आगे चल रही थी। ढोल-मंजीरा एवं जसगीत के साथ किया गया जवारा विसर्जन किया गया। जवारा कलशों को विसर्जन करने के दौरान माँ सर्वमंगला देवी मंदिर से लेकर हसदेव घाट तक माँ का जयकारा गूंजता रहा। ढोल-मंजीरा के साथ जसगीत भी गूंज रहे थे। भजन कीर्तन करने वाले रास्ते भर माँ की भक्ति में झूमते रहे। वही इसके अलावा शहर के दादर स्थित कंकालीन मंदिर में 9 दिन तक चल विशेष पूजा अर्चना के बाद कन्या भोज कराया गया जहां काफी संख्या में भक्तों की भीड़ रही। वही सीतामढ़ी स्थित मां दुर्गा मंदिर में 9 दिनों तक मां के ज्योत जलाए गए वही 9 दिनों तक कीर्तन भजन के साथ विशेष पूजा अर्चना की गई अंतिम दिन कन्या भोज करा कर नवरात्र को विदाई दी गई। इसके अलावा नौ दिनों तक लोग मां दुर्गा को अलग-अलग रूपों में देखें और उपवास रहने के बाद अंतिम दिन अपने-अपने घरों में कन्या भोज कर और छोटे-छोटे बच्चों को मां का सिंगार देकर उन्हें विदाई दी गई।