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जीपीएम में आज से हुई धान खरीदी की शुरुआत, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति की हड़ताल से खरीदी बेपटरी

छत्तीसगढ़ में आज 15 नवंबर से धान खरीदी योजना की विधिवत शुरुआत हुई है पर , आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से धान खरीदी पहले दिन पूरी तरह बेपटरी नजर आई। प्रशासन ने सेवा सहकारी कर्मचारी के स्थान पर धान खरीदी के लिए कृषि विभाग, राजस्व विभाग एवं उद्यान विभाग के कर्मचारियों को नियुक्त किया है जो इस वर्ष धान खरीदी करेंगे। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में इस वर्ष शासन ने लगभग एक लाख 51 हजार मेट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए 35259 हेक्टेयर भूमि से धान खरीदी की जाएगी वहीं 24493 किसानों ने अब तक धान खरीदी के लिए अपना पंजीयन कर लिया है, इतने धान खरीदी के लिए मार्केटिंग फेडरेशन को लगभग 7581 गठान जुट बारदानों की आवश्यकता होगी। फिलहाल नए पुराने बारदाने मिलकर 5059 गठान की व्यवस्था का दावा मार्केटिंग फेडरेशन कर रहा है, पर पहले दिन धान खरीदी पूरी तरह अव्यवस्थित नजर आई, खरीदी केंद्रों में न तो शासन के द्वारा धान खरीदी उत्सव का कहीं फ्लेक्स लगाया गया न, तो तराजू , कुर्सी टेबल , रजिस्टर लाइट नजर आई, और तो और जिन कंप्यूटरों मैं खरीदे गए धान को अपलोड जाएगा वह कंप्यूटर भी खरीदी केंद्र में नजर नहीं आए, गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में 20 धान खरीदी केंद्रों में धान की खरीदी होती है, जिसके लिए जिला प्रशासन ने 17 कर्मचारियों को धान खरीदी केंद्र प्रभारी बनाया है साथ ही सभी 20 खरीदी केंद्रों के लिए नए कंप्यूटर ऑपरेटर को भी ट्रेनिंग दे दी गई है , जिन कर्मचारियों को धान खरीदी के लिए नियुक्त किया गया है वे सुबह 10:00 बजे खरीदी केंद्र पहुंच गए पर उन्हें धान खरीदी और उसके दौरान होने वाले कार्यों की कोई जानकारी नहीं है, ना तो उन्हें धान की परख है, न ही उन्हें यह पता है कि धान खरीदी के लिए लेबर कहां से आएंगे। जिन दस्तावेजों में धान खरीदी करना है वह रजिस्टर भी उनके पास उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यदि सेवा सहकारी समितियां के कर्मचारियों की हड़ताल लंबी चली तो धान खरीदी करना शासन प्रशासन के लिए काफी कठिन काम होगा। धान खरीदी की पुरानी व्यवस्था और सुखत के साथ अपनी मांगों को लेकर सेवा सहकारी समिति के कर्मचारी अड़े हुए हैं वहीं किसानों के खलिहानों में धान तैयार है शासन धान खरीदना चाहती है पर कर्मचारियों की हड़ताल ने पूरी व्यवस्था को डामाडोल कर रखा है।मार्केटिंग फेडरेशन के कर्मचारियों का दावा है कि जिन कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है वे धान खरीदेंगे और शासन की व्यवस्था रुकेगी नहीं।

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