जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। एक मानसिक रूप से अस्वस्थ 22 वर्षीय आदिवासी युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए ऑटो के पायदान में रखकर जिला अस्पताल लाया गया। पोस्टमार्टम के बाद भी परिजनों को शव वाहन नहीं मिला, जिससे उन्हें उसी ऑटो से शव वापस ले जाना पड़ा।
मृतक कमलेश गोंड विशेषरा गांव का निवासी था। वह लंबे समय से मानसिक बीमारी से पीड़ित था। इलाज के अभाव में परिजन उसे अस्पताल के बजाय झाड़फूंक के लिए माटी कछार गांव ले जा रहे थे। इसी दौरान युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना के बाद पिता ज्ञान सिंह गोंड बेटे के शव को ऑटो के पायदान में रखकर करीब 20 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद भी अस्पताल प्रबंधन या पुलिस ने शव वाहन की व्यवस्था नहीं की। मजबूर परिजन शव को उसी ऑटो में रखकर लगभग 15 किलोमीटर दूर अपने गांव विशेषरा ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरे रास्ते शव का एक हिस्सा ऑटो से बाहर निकला रहा।
परिजनों ने बताया कि शव को अस्पताल तक लाने और वापस गांव ले जाने के लिए ऑटो चालक को करीब 2000 रुपये देने पड़े। पिता ज्ञान सिंह सिर झुकाकर ऑटो में पीछे बैठे थे। यह घटना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को दर्शाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी उजागर हुई है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर भारी नाराजगी है। जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह मामला सरकारी सुविधाओं के अभाव को स्पष्ट रूप से दिखाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने की कार्रवाई
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 22 वर्षीय युवक के शव को पोस्टमार्टम के बाद ऑटो के पायदान में ले जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने जिला प्रभारी 1099 शव वाहन सेवा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें शव घर तक न छोड़ने, फोन कॉल रिसीव न करने और वाहन को बस स्टैंड में पाए जाने को गंभीर लापरवाही बताया गया है।