ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 16 जून से जिले के विद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ। शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में बच्चों की चहल-पहल और उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। लंबे अवकाश के बाद विद्यालय खुलते ही विद्यार्थियों के चेहरों पर नई ऊर्जा साफ झलक रही थी।
सुबह विद्यालय पहुंचते ही विद्यार्थियों ने शिक्षकों और सहपाठियों का आत्मीय अभिवादन किया। उन्होंने प्रार्थना सभा में शामिल होकर नए शैक्षणिक वर्ष की सकारात्मक शुरुआत की। विद्यालय परिसरों में बच्चों की मधुर आवाजें और मित्रों से मिलने की खुशी थी। नई कक्षाओं में प्रवेश का उत्साह वातावरण को जीवंत बना रहा था।
प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों ने शिक्षिकाओं को गिनती, वर्णमाला और पहाड़े सुनाए। पहली बार विद्यालय पहुंचे छोटे बच्चों के लिए शिक्षकों ने विशेष स्वागतपूर्ण माहौल बनाया। माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अवकाश के अनुभव साझा किए। उन्होंने पारिवारिक भ्रमण, ग्रीष्मकालीन शिविर, खेल गतिविधियों और नई कौशल सीखने की बातें बताईं। विद्यार्थियों में नए लक्ष्य निर्धारित करने और आगामी परीक्षाओं की तैयारी का उत्साह दिखा।
विद्यार्थियों का उत्साह और स्वागत
विद्यालयों में नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का शिक्षकों और सहपाठियों ने आत्मीय स्वागत किया। कई विद्यार्थियों को नए मित्र मिले, जिससे वे प्रसन्न थे। अनेक छात्र-छात्राएं लंबे अंतराल के बाद अपने पुराने साथियों से मिलकर खुश नजर आए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को अनुशासन, नियमित अध्ययन और स्वच्छता के लिए प्रेरित किया। उन्हें विद्यालयीन गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
शैक्षणिक गतिविधियों का आरंभ
जिले के विभिन्न विद्यालयों में पहले दिन अध्ययन-अध्यापन की गतिविधियां शुरू हुईं। बच्चों को पाठ्यक्रम, समय-सारिणी और विद्यालयीन व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत ने विद्यार्थियों के मन में सीखने का उत्साह भर दिया है। यह उन्हें आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगा। विद्यालयों में बच्चों की रौनक ने शिक्षा को उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला बताया।