बालोद देश भर में रंगों के त्योहार होली की धूम मची है. चहुओर लोग रंग, गुलाल लगाकर एक दूसरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते होली के जश्न में डूबे हैं. देश के किसी कोने में लठमार होली खेली जा रही है तो कहीं कुर्ता फाड़ होली की धूम है. इसी बीच भोज साहू पर्यावरण प्रेमी व उनके छ: वर्षीय पुत्र वृक्षांश साहू नीम पेड़ों के साथ अनोखी होली हल्दी चंदन कुमकुम व विभिन्न रंगों के फूलों से रंग मिलाकर पेड़ पौधे पर रंग लगाकर मनाई ।. साथ ही उनके साथी शुभम् गुर्वे, डेमन सिन्हा, दर्शन सहारे,कुलदीप ठाकुर सरपंच लोगों ने पेड़ पौधों के साथ होली मनाई और उनका आभार जताया। पेड़ पौधों के साथ पर्यावरण प्रेमियों ने मनाई होली इस पर पेड़ पौधों के साथ होली मनाकर लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. दरअसल पर्यावरण प्रेमी लगभग डेढ़ दशक से पेड़ पौधों के साथ होली, दीवाली और रक्षा बंधन का त्योहार मनाते आ रहे हैं इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण के लिए अनेकों मुहिम चलाते आ रहे हैं गर्मी के दिनों में पशु पक्षियों के लिए दाना पानी का इंतजाम करते आ रहे हैं। भोज साहू पर्यावरण प्रेमी इस तरह होली खेलने पर बताया कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जोड़ने व पर्यावरण के सुरक्षा के लिए हम सभी को आगे आने की आवश्यकता है आज लोग होली के नाम अनेको हरे भरे पेड़ पौधे का काटकर होलिका दहन कर देते हैं पर्यावरण को नुक्सान न पहुंचे इस बात को ध्यान में रखते हुए सुखा लकड़ी कंडा को जलाने व कैमिकल युक्त रंग न खेलकर प्रकृति में खिले पेड़ पौधे के फुलों पलाश गुलाब गेंदा जैसे फुलों से खेलने के लिए अपील किया है कुछ दिन इसी पेड़ों की नाली निर्माण व बिजली तार खिंचने के लिए कटाई होने वाला था जिसे रोकथाम करवाया था इन्हीं पेड़ पर कबाड़ से जुगाड कर रक्षाबंधन के समय बड़ा सा राखी बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश लिखकर लटकाया है जो राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित करता है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।