पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने उत्तर भारत में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि इस गंभीर समस्या पर न तो कोई ठोस बजट दिया गया और न ही इस पर कभी कैबिनेट स्तर पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान नाम बदलने, नफरत फैलाने, झूठ और अपशब्दों की राजनीति में ही उलझा हुआ है, जबकि आम आदमी के जीवन से उसका कोई सरोकार नहीं दिखता।
पप्पू यादव ने कहा कि कोरोना काल जैसी बड़ी मानव-निर्मित आपदा को भी नेताओं और व्यवस्था ने और अधिक अमानवीय बना दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा और विधानसभा में आम नागरिकों के मुद्दों पर शायद ही कभी चर्चा होती है। उनके अनुसार देश की करीब 85 करोड़ आबादी सिर्फ 5 किलो अनाज पर निर्भर है, जबकि लगभग 20 करोड़ लोगों के पास अपना घर तक नहीं है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सदन में बैठने वाले नेताओं के घरों में कई एयर कंडीशनर लगे हैं, ऐसे में वे प्रदूषण की समस्या को कैसे समझेंगे या उसका समाधान करेंगे। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार नीतियों के जरिए ज़हर पैदा कर रही है और दूसरी ओर प्रदूषण सुधारने की बातें कर रही है, जबकि इस दिशा में सरकार के पास कोई स्पष्ट और ठोस नीति ही नहीं है।