बिहार में चुनावी माहौल की वजह से पटना की सड़कें स्थानीय लोगों और पर्यटकों, दोनों से गुलज़ार रहती हैं। स्ट्रीट फ़ूड विक्रेताओं का कारोबार तेज़ है, और शहरी इलाकों में देर रात तक रौनक है। कुछ साल पहले तक बिहार में इस तरह की तस्वीरें अकल्पनीय थीं लेकिन अब कम से कम पटना के कुछ हिस्सों में तो देर रात तक दुकानें खुली रहती हैं। इन तस्वीरों को देखकर साफ लगता है कि बिहार में काफी कुछ बदल गया है। जेपी गंगा पथ को पटना के मरीन ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है। गंगा के किनारे 20 किलोमीटर लंबा रास्ता है, अब यहां देर रात तक चहल-पहल रहती है। स्थानीय निवासी अभिषेक बोले, "पहले ऐसा संभव नहीं था। अभी बिहार बिल्कुल बदल चुका है। बहुत अच्छा लग रहा है गवर्नमेंट ने काफी काम किया है यहां पर। मैं आपको बताना चाहूंगा मैं और लेट कर रहा था कि और लेट से जाऊं क्योंकि बिहार अब सुरक्षित है और काफी अच्छा है और यहां पर जो व्यवस्था है न मरीन ड्राइव का खासकर ये जो अभी जिस जगह पर हम लोग बैठे हैं जिस बस में ऑपन बस में डबल डेकर में। ऐसा मतलब मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी यहां पर लेकिन बहुत अच्छा लगा है यहां पर।"
मौज-मस्ती और आराम के लिए बाहर जाने वाले परिवारों का कहना है कि अब वे रात में बाहर निकलने में खतरा महसूस नहीं करते। काम की वजह से दूसरे प्रदेशों में चले गए बिहार के लोग विकास से तो सहमत हैं लेकिन सुरक्षा अब भी उनके लिए अहम मुद्दा है। विकास का समर्थन करने वाले लोगों के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मानते हैं बिहार में विकास केवल कागज पर हुआ हैं। स्थानीय निवासी अबू कमर ने कहा, "अब बतलाइए कि सच क्या है? क्या घूमने के लिए पटना में है पूरा तो कचरा मचा हुआ है। आप जाइए यूपी का जो है राजधानी लखनऊ घूमिये और पटना को मिलाइए। आपको जमीन आसमान का फर्क मिलेगा। साफ-सुथरा नहीं है, दूसरी बात आप हॉस्पिटल चले जाएं वहां सफाई नहीं मिलेगा। विकास तो है नहीं वो तो खत्म हो गया है बिहार में। कोई भी सरकार आती है सिवाय लूट मारके, बिहार में नहीं होता है। सब दिलासा दिलाती हैं कि हम ये करेंगे वो करेंगे और बिहार में तब्दीली नाम की कोई चीज नहीं है।" पटना की नाइटलाइफ़ कई लोगों के लिए सुखद है, लेकिन हाल फिलहाल में हुईं वारदातें चिंता का विषय बनी हुई हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 6 नवंबर को पटना जिले के 14 विधानसभा क्षेत्रों में वोटिंग होगी जबकि वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी।