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खुल गए यमुनोत्री-गंगोत्री धाम के कपाट

Mon, 13 May 2013 04:30 PM IST
देहरादून/उत्तरकाशी/ब्यूरो
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उत्तराखंड में हिमालय की गोद में बसे चारधामों को हिंदू धर्म में साक्षात स्वर्ग की सीढ़ी माना जाता है। इस वर्ष अक्षय तृतीया यानी 13 मई से इन धामों के कपाट खुलने का सिलसिला शुरू हो गया है।
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इसी के साथ चारधाम यात्रा की विधिवत शुरुआत भी हो गई है, जो अगले छह माह तक चलेगी। हालांकि यात्री शुक्रवार से ही चारधाम के लिए ऋषिकेश से रवाना हो रहे हैं।

रविवार को भी यहां से 72 वाहनों में 2293 यात्री धामों को रवाना हुए।

सबसे पहले सूर्यपुत्री और यम भगिनी यमुना के अवतरण स्थल यमुनोत्री धाम के कपाट 13 मई को खुलेंगे।

14 मई को भगवान आशुतोष के पावन धाम (केदारनाथ) के द्वार खुलेंगे। 16 मई को ब्रह्ममुहूर्त में बदरीनाथ धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।

अपने आस्था केंद्रों और आराध्यों के दर्शनों की ललक श्रद्धालुओं को तमाम विघ्न-बाधाओं के बावजूद बड़ी शिद्दत से खींच रही है। साल-दर-साल श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।
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वर्ष 2001 में चार धाम की यात्रा पर आने वाले लोगों की संख्या आठ लाख थी, जो वर्ष 2012 में बढ़कर 25 लाख पहुंच गई।

चारधाम यात्रा का महत्व
धर्मग्रंथों में इस यात्रा की महिमा का काफी गुणगान किया गया है। कहा जाता है कि जिसने चारों धाम देख लिए उसने मानो धरती पर ही स्वर्ग के दर्शन कर लिए।

चुनौतियां भी कम नहीं
चारधाम यात्रा सुगम नहीं है। दुर्गम और बदहाल रास्तों के अलावा मौसम भी पग-पग पर तीर्थयात्रियों के शरीर, मन और धैर्य की परीक्षा लेते हैं। बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को खासतौर पर सावधान रहने की जरूरत होती है।
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