जनपद के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षात्मक कार्यों के लिए प्रशासन भूगर्भीय वैज्ञानिकों की बाट जोह रहा है। एक टीम पूर्व में सर्वे कर लौट चुकी है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि शासन की ओर से एक और टीम भेजी जा रही है। उस टीम की रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई होगी।
बीते 18 जुलाई को जनपद के मांडों व कंकराड़ी गांव में बादल फटने से तबाही मची थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उक्त गांवों सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों के सर्वे के लिए भूगर्भीय वैज्ञानिकों का दो सदस्यीय दल यहां पहुंचा था। दल ने सर्वे रिपोर्ट प्रशासन को करीब एक माह पूर्व सौंप दी है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि शासन की ओर से 15 अगस्त के बाद एक और भूगर्भीय वैज्ञानिकों का दल सर्वे के लिए भेजा जा रहा है। दूसरे दल की सर्वे रिपोर्ट के बाद भी इन गांवों में सुरक्षात्मक कार्य करवाए जाएंगे। प्रधान सत्य नारायण सेमवाल का कहना है कि ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों में लौट रहे हैं। प्रशासन ने कुछ दिन पूर्व लालटेन दी थी, जो एक घंटे भी जल नहीं पा रही है। एसडीएम तीर्थपाल सिंह का कहना है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के लिए शासन की ओर से भूगर्भीय वैज्ञानिकों का एक और दल आना है। दल के सर्वे के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।