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ऋषि कुमारों ने संस्कृति की रक्षा के लिए की प्रार्थना

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उत्तरकाशी के श्री काशी विश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय में यज्ञोपवीत संस्कार में उपस्थित ऋषि कुम? - फोटो : UTTER KASHI
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श्री विश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय में श्रावणी पूर्णिमा व संस्कृत भाषा दिवस पर नये प्रवेशित 70 ऋषि कुमारों का वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूरे विधि विधान से यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। इस अवसर पर ऋषि कुमारों ने नगर में स्थित भगवान कंडार देवता, परशुराम, दत्तात्रेय महाराज, अन्नपूर्णा माता, भैरव और शक्तिमाता व काशी विश्वनाथ मंदिर का दर्शन व पूजन किया।
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रविवार को महाविद्यालय में यज्ञोपवीत संस्कार कार्यक्रम का शुुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद प्रसाद सेमल्टी ने बरगद का पौधा रोपकर किया। उन्होंने ऋषि कुमारों को ज्ञान-विज्ञान के संबंध में उपदेश दिया। विशिष्ट अतिथि सहायक सैनिक कल्याण अधिकारी महावीर राणा ने ऋषि कुमारों से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए सदैव प्रत्यत्नशील रहने की बात कही। इससे पूर्व दिल्ली के यजमान प्रमोद गुप्ता के सहयोग से प्रात: पांच से सात बजे तक ऋषि कुमारों का मुंडन, सात से नौ बजे तक गणेश पंचांग पूजन एवं नौ से 11 बजे तक यज्ञ, हवन व दीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ऋषि कुमारों के अभिभावक भी उपस्थित रहे। बाद में स्वामी शिवानंद आश्रम के स्वामी गंभीरानंद ने अपने आश्रम में ऋषिकुमारों का अभिनंदन वंदन व स्वागत करते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक दक्षिणा व परंपरा निर्वहन के लिए भिक्षा प्रदान की। संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. राधेश्याम खंडूूड़ी ने बताया कि प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा पर यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता है। इस मौके पर प्रधानाचार्य रामानंद बनूनी, पीजी कॉलेज उत्तरकाशी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र दत्त पैन्यूली, रामकृष्ण भट्ट, डॉ. द्वारिका प्रसाद नौटियाल, अनिल बहुगुणा, भगवती प्रसाद उनियाल आदि मौजूद थे।
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