पीजी कालेज उत्तरकाशी का पुस्तकालय बदहाल स्थिति में है। यहां पुस्तकालय में रीडिंग रूम के नाम पर एक हॉल में कुछ कुर्सियां डाली गई हैं, जिसमें 20 से 25 छात्र एक साथ नहीं बैठ सकते। जबकि कालेज में छात्र संख्या तीन हजार के करीब है। इसके अलावा पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकें भी काफी पुरानी हैं, जिनमें छात्रों को पाठ्यक्रम भी कम ही उपलब्ध हो पाता है। छात्रों का कहना है कि पुस्तकालय की खराब स्थिति का प्रभाव उनके पठन-पाठन पर पड़ रहा है।
किसी भी शिक्षण संस्थान के छात्रों के लिए पुस्तकालय एक महत्वपूर्ण संसाधन होता है। सुव्यवस्थित व संसाधनों से परिपूर्ण पुस्तकालय उस संस्थान के छात्रों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन पीजी कालेज उत्तरकाशी में पुस्तकालय की स्थिति दयनीय बनी हुई है। यहां करीब 78 हजार से अधिक किताबें हैं, लेकिन इन किताबों में छात्रों को पाठ्यक्रम की सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती है। पुस्तकालय में अधिकांश पुस्तकें गढ़वाल विवि के पाठ्यक्रम से संबंधित है, जबकि पीजी कालेज में श्रीदेव सुमन विवि का पाठ्यक्रम संचालित होता है, जिससे छात्र इन पुस्तकों का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। इसके अलावा पुस्तकालय में कर्मियों की भी कमी बनी हुई है। यहां पुस्तकालयाध्यक्ष सहित कई अन्य पद रिक्त हैं। सबसे बुरी स्थिति रीडिंग रूम की है। रीडिंग रूम के नाम पर एक छोटे से हॉल में कुछ कुर्सियां व मेज रखे गए हैं। पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकों की उपलब्धता भी ना के बराबर है। पुस्तकालय की इस स्थिति पर छात्रों ने कड़ा आक्रोश जताया है।
- कालेज में लाइब्रेरी की स्थिति बड़ी दयनीय है। यहां अधिकांश किताबें गढ़वाल विवि के पाठ्यक्रम से संबंधित हैं, जबकि कालेज में श्रीदेव सुमन विवि का पाठ्यक्रम संचालित होता है। छात्रों को पुस्तकालय का लाभ नहीं मिल पा रहा है। -पृथ्वीपाल मटूड़ा, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष पीजी कालेज उत्तरकाशी।
- पुस्तकालय में मौजूद किताबों में पाठ्यक्रम नहीं मिलता है, जिससे खासी दिक्कतें होती हैं। खाली समय में रीडिंग रूम में बैठकर किताबें पढ़ने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। पुस्तकालय को सुविधाओं से युक्त किया जाना चाहिए। -सुधा राणा, एमए प्रथम वर्ष, पीजी कालेज उत्तरकाशी।
- पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें भी उपलब्ध होनी चाहिए, जिनको रीडिंग रूम में बैठकर पढ़ा जा सके, लेकिन यहां पुस्तकालय की स्थिति दयनीय बनी हुई है। कालेज प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। -मनीषा राणा, एमए प्रथम वर्ष पीजी कालेज उत्तरकाशी।
- कालेज का पुस्तकालय केवल औपचारिकता भर है। यहां न तो स्तरीय पुस्तकें उपलब्ध हैं और न ही संसाधन। किताबें गढ़वाल विवि के पाठ्यक्रमों से संबंधित हैं और कालेज में श्रीदेव सुमन विवि का पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। कालेज प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना होगा। -बबीता राणा, एमए फाइनल पीजी कालेज उत्तरकाशी।
- पुस्तकालय में पुस्तकालयाध्यक्ष का पद रिक्त है। इस संबंध में निदेशालय को अवगत कराया गया है। छात्रों को बेहतर सुविधा उपलब्ध किए जाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। -प्रो. सविता गैरोला, प्राचार्य, पीजी कालेज उत्तरकाशी।